रवीश कुमार की कहानी | रवीश कुमार स्‍टोरी इन हिन्‍दी

रवीश कुमार की कहानी (जीवन, शिक्षा, प्रेम, कैरियर, किताबे, पत्‍नी, कार्यक्रम, शौक, तथ्‍य)

चाटुकारिता के इस दौर में जिस एक पत्रकार ने पत्रकारिता के मूल्‍यों को जिन्‍दा रखा हुआ है। जो अभी भी सत्‍ता के सामने बेबाकी से जन सरोकार से जुडे सवालों को उठा रहा है। जिसको सत्‍ता के बेशुमार पैसे और सेंसरशिप की तलवार अब तक छू भी नही पाई है। वो पत्रकार जिसकी पत्रकारिता के चाहनों वालों की संख्‍या करोडो में है। वो पत्रकार जिसे पसन्‍द करने वाले अपना हीरों ना पसन्‍द करने देश द्रोही, अर्बन नक्‍सल, पाकिस्‍तानी और ना जाने क्‍या क्‍या कहते है। हम जिस पत्रकार की बात कर रहे है। उस पत्रकार का नाम है रवीश कुमार। आज इस लेख में हम आपको रवीश कुमार की कहानी सुनाने वाले है।

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रवीश कुमार की कहानी की शुरूआत 

रवीश कुमार का जन्‍म 5 दिसम्‍बर 1974 को बिहार के चंपारन जिले के मोतीहारी के जितवारपुर नाम के गांव में हुआ था। उनके पिता का नाम बलिराम था। रवीश कुमार का परिवार एक ब्राह्मण परिवार है। रवीश कुमार का पूरा नाम (ravish kumar full name) रवीश कुमार पांडेय है।

रवीश कुमार बचपन से ही पढाई में काफी ज्‍यादा होशियार रहे है। उन्‍होने अपने शैक्षिक जीवन की शुरूआत पटना के लॉयला हाई स्‍कूल से की। उन्‍हे स्‍कूल की किताबे से ज्‍यादा महापुरूषो पर लिखी गई किताबे और साहित्‍य की किताबे पढना अच्‍छा लगता था। वो अपने बचपन की बात करते हुए बताते है कि जब वो 9वीं कक्षा में थे तो उन्‍होने एक किताब में कुछ पक्तियां पढी जो कुछ इस प्रकार थी।
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अपनी बाल अवस्‍था में ही रवीश कुमार ने इन पक्तियां को हमेश हमेशा अपने जेहन में उतार लिया। उनकी पूरी जिन्‍दगी इन्‍ही कुछ पक्तियों के आस पास सिमटी हुई दिखाई देती है।

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रवीश कुमार की शिक्षा

पटना में अपनी प्रारम्भिक शिक्षा पूरी करने के बाद रवीश कुमार ने दिल्‍ली की तरफ रूख किया। वो पढाई में काफी ज्‍यादा अच्‍छे थे। इसलिए उनका एडमीशन दिल्ली विश्वविद्यालय के देशबन्‍धु कॉलेज में हो गया। इस कॉलेज से उन्‍होने अपना स्‍नातक किया। बाद में उन्‍होने भारतीस जनसंचार सस्‍थान से (IIMC) से डिप्‍लोमा भी किया। पत्राकारिता में डिप्‍लोमा करने के बाद वो पत्रकारिता के क्षेत्र में चले गये।

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रवीश कुमार की लव लाइफ

रवीश कुमार की कहानी उनकी लव लाइफ का जिक्र किये बिना अधूरी है।  आज के दौर में बेहद गम्‍भीर पत्रकारिता करने वाले रवीश कुमार को एक लडकी से प्‍यार भी हो चुका है। रवीश कुमार जब देशबन्‍धु कॉलेज में पढाई कर रहे थे। तो वो अपनी एक सहपाठी जिसका नाम नयना दास गुप्‍ता को दिल दे बैठे थे।

असल में बिहार के गांव से दिल्‍ली आने वाले रवीश कुमार हिन्‍दी मीडियम के छात्र थे। उन्‍हे इंग्लिश नही आती थी। वो इंग्लिश बोलने वालों के सामने जाते हुए भी डरा करते थे। अपने इसी डर के चक्‍कर में उन्‍हे दिल्‍ली के गोविन्‍दपुरी में अपने दोस्‍तो से बिल्‍कुल अलग एक कमरा ले रखा था। कॉलेज में एक से बढकर एक अग्रेजी बोलने वाले थे। इसलिए अग्रेंजी ना बोलने के अपराधबोध के चलते वो कॉलेज में बेहद कम बोला करते थे।

जब नयना दास गुप्‍ता ने रवीश का अग्रेजी भाषा को लेकर ऐसा डर देखा। तो उन्‍होने रवीश से कहा कि उन्‍होने अग्रेजी को लेकर डरने की कोई जरूरत नही है। वो उन्‍हे अग्रेजी सिखायेगी। और वो बहुत जल्‍द काफी अच्‍छी अग्रेजी बोलने लगेगे। नयना बंगाल से थी और उनकी अग्रेजी भाषा पर काफी अच्‍छी पकड थी।

फिर क्‍या था रवीश रोजाना नयना से अग्रेजी सीखने लगे। अग्रेजी सीखते सीखते कब वो नयना से प्‍यार करने लगे। उन्‍हे खुद भी पता नही चला। नयना को भी रवीश कुमार की सादगी भा गई। और वो भी रवीश को अपना दिल दे बैठी। दोनो ने एक दूसरे को तकरीबन सात साल तक डेट किया। बाद में रवीश कुमार ने नैना से शादी कर ली।

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क्‍योकि इन दोनो की जातिया अलग अलग थी। इसलिए रवीश को पिता इस शादी से राजी नही थे। लेकिन रवीश कुमार ने अपने पिता की मर्जी के खिलाफ जाकर नयना से शादी की। बाद में रवीश के परिवार ने नयना को स्‍वीकार कर लिया। आज इन दोनो की दो लडकिये है और ये दोनो दिल्‍ली में एक साथ रहते है। नयना दास गुप्‍ता दिल्‍ली के लेडी श्री राम कॉलेज में इतिहास की प्रोफेसर है।

रवीश कुमार का कैरियर

रवीश कुमार पत्रकारिता में आने से पहले यूपीएससी के लिए तैयारी किया करते थे। वो सिविल सेवा में जाना चाहते थे। उनके लिखने की शैली काफी अच्‍छी थी। एक दिन उनके एक टीचर ने उनके लेख को देखकर उन्‍हे सलाह दी। कि वो पत्रकारिता के क्षेत्र में अच्‍छा कर सकते है। अपने गुरू की बात सुनकर रवीश कुमार ने सोचा कि क्‍यो ना एक बार पत्रकारिता में ट्राई किया जाये।

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उन्‍होने पत्रकारिता में अपने कैरियर की शुरूआत 1996 में एनडीटीवी के साथ ही की। ये वो दौर था  हिन्‍दुस्‍तान में टेलीविजन अपनी शक्‍ल बदलने के लिए एकदम तैयार था। 24 घन्‍टे के खबरी चैनल टीवी सेट पर अपनी दस्‍तक देने शुरू कर चुके थे। उस वक्‍त एनडीटीवी नये पत्रकारो से लिए जैसे ईडेन गार्डन की तरह थी। कई लोग विदेश से पढके आने के बाद एनडीटीवी में शामिल हुए थे। तो कुछ लोग देश में ही उच्‍च शिक्षा प्राप्‍त करके इस चैनल में आये। इन सबके बीच गांव देहात से आये देसी भाषा बोलने वाले रवीश कुमार अपनी अलग ही धुन में अपनी पहचान बनाने की तैयारी कर रहे थे।

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अपने कैरियर की शुरूआत में रवीश कुमार चैनल पर आने वालों पत्रों को पढा करते थे। उनका काम प्रोड्यूसर को जनता का फीडबैक देने का था। राजदीप सरदेसाई उनके सीनियर और बॉस हुआ करते थे। राजदीप ने ही उन्‍हे पहली बारा रिर्पोटिग करने का मौका दिया था। बाद में रवीश कुमार ने जो किया वो अपने आप में ही एक मिसाल बन चुका है।

रवीश कुमार के कार्यक्रम

रवीश कुमार के पहले कार्यक्रम का नाम रवीश की रिपोर्ट था। रवीश की रिर्पोट में रवीश ने अपनी अलग भाषाशैली में उन मुद्दें को उठाया। जिन पर कोई बात नही करता था। उनकी रिपोर्ट करने का ढग बहुत ही खास और निराला था। इसी के चलते रवीश की रिपोट को काफी ज्‍यादा पसन्‍द किया गया। रवीश  ‘रवीश की रिपोर्ट‘ के चलते काफी फेमस हो गया। उन्‍होने अपने चैनल की लोकप्रियता को काफी ज्‍यादा बढा दिया। जिसके चलते चैनल ने उन्‍हे एक और कार्यक्रम ‘हम लोग’ दे दिया। रवीश ने हम लोग में भी कमाल कर दिया।

इस कार्यक्रम में उन्‍होने भारत के उन लोगो की कहानियों को दुनिया के सामने रखा जिन्‍होने अपनी जिन्‍दगी में अपनी मेहनत के दम पर काफी कुछ अचीव किया था। ये शो भी हिट साबित हुआ। इस शो के बाद रवीश कुमार को अपने चैनल का प्राइम टाइम मिल गया। वो रोज रात 9 बजे प्राइम टाइम में आने लगे। वो अब तक प्राइम टाइम में सैकडों मुद्दों को कवर कर चुके है।

रवीश कुमार की पसन्‍द

रवीश कुमार को पुराने गाने सुनना काफी पसन्‍द है। इसके अलावा उन्‍हे किताबे पढना और घूमना काफी पसन्‍द है। उन्‍हे अभिनेताओं में अमिताभ बच्‍चन काफी अच्‍छे लगते है। टीवी पर जब भी अमिताभ बच्‍चन की कोई फिल्‍म आती है। तो वो आज भी टीवी के सामने चिपक कर बैठ जाते है।

रवीश कुमार को मिले अवार्ड

वैसे तो रवीश कुमार को अपनी पत्रकारिता के लिए कई अवार्ड मिल चुके है। लेकिन उनके मिले प्रमुख अवार्ड कुछ इस तरह  है।

  • उन्‍हे उनकी पत्रकारिता के लिए साल 2013 में रामनाथ गोयनका एक्सीलेंस अवार्ड से नवाजा गया था।
  • इसके अगले ही साल 2014 को सर्वश्रेष्‍ठ हिंदी समाचार एंकर चुना गया था।  साल 2014 में सर्वश्रेष्ठ हिंदी समाचार एंकर चुना गया था।
  • रवीश को दो साल बाद 2016 में इंडियन एक्‍सप्रेस के जरिये 100 सबसे प्रभावशाली भारतीयों में शामिल किया गया।
  • उन्‍हे साल 2016 में मुंबई प्रेस क्लब द्वारा वर्ष का सर्वश्रेष्ठ पत्रकार चुना गया था।
  • रवीश कुमार को सबसे बडी उपलब्धि तक मिली जब उन्‍हे 2019 में रेमन मैग्सेसे अवार्ड से सम्‍मानित किया गया। आपको बता दे कि रेमन मैग्सेसेअवार्ड को एशिया का नोबल पुरूस्‍कार कहा जाता है।

रवीश कुमार की कहानी से जुडे अनोखे तथ्‍य

  • रवीश कुमार खुद टीवी मीडिया से जुडे हुए है। लेकिन वो खुद टीवी पर खबरे देखने के लिए लोगो से मना करते है। उनका मानना है कि टीवी लोगो के दिमागों को सही मुद्दों भटका रहा है। वो कई बार लोगो को टीवी ना देखने की सलाह चुके है।
  • रवीश कुमार ने अपने पिता की मर्जी के खिलाफ अपनी जाति से बाहर शादी की है। उनकी पत्‍नी बंगाल की है। जिनका नाम नयनतारा है।
  • पत्रकारिता के अलावा रवीश साहित्‍य में भी काफी रूचि रखते है। उन्‍हे कवितायें लिखने का भी काफी शौक है।
  • रवीश कुमार कस्‍बा नाम का एक ब्‍लॉक भी चलाते है। कस्‍बा के अलावा उनका एक और ब्‍लॉग भी है जिसका नाम ravishkumar.org है।
  • रवीश कुमार सत्‍ता विरोधी पत्रकारिता के चलते ट्रोल भी होते रहते है। वो बीजेपी की आईटीसेल के निशाने पर रहते है। उन्‍हे जान से मारने की धमकी भी मिल चुकी है।
  • रवीश कुमार को देश-विदेश के शिक्षा सस्‍थानों में लेक्‍चर देने के लिए भी बुलाता जाता है।

रवीश कुमार की किताबे

रवीश कुमार अब तक दो किताबे लिख चुके है

  • इश्‍क में शहर होना
  • बोलना ही है

रवीश की इन दोनो किताबों को काफी ज्‍यादा पसन्‍द किया गया था।

सवाल- रवीश कुमार के भाई का क्‍या नाम है?

जवाब-रवीश कुमार के भाई का नाम ब्रजेश कुमार पॉडेय है। उनके भाई कॅाग्रेस के बडे नेताओं में से एक है।

सवाल- रवीश कुमार की सैलरी कितनी है?

जवाब- एक अनुमान के मुताबिक रवीश कुमार की मासिक सैलरी 25 लाख रूपये में करीब है।

सवाल- रवीश कुमार की पत्‍नी का नाम क्‍या है ?

जवाब-रवीश कुमार की पत्‍नी का नाम नयना तारा है। उनकी पत्‍नी लेडी श्रीराम कॉलेेज में इतिहास की प्रोफेसर है।

सवाल- रवीश कुमार कहा से है?

जवाब- रवीश कुमार पटना से है।

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2 thoughts on “रवीश कुमार की कहानी | रवीश कुमार स्‍टोरी इन हिन्‍दी”

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