Brahmastra ka itihas kya hai | ब्रह्मास्त्र के बारे में 10 रोचक तथ्‍य

अभी हाल ही में एक फिल्‍म रिलीज हुई है जिसका नाम है ब्रह्मास्त्र (brahmastra)। इस फिल्‍म के रीलीज हो जाने के बाद लोगो की brahmastra ka itihas kya hai को लेकर जागरूकता काफी ज्‍यादा बढ़ गई है। ब्रह्मास्त्र फिल्‍म को बनाने वाले ही ये दावा कर रहे है कि उन्‍होने ये फिल्‍म पुरातन समय के दिव्‍य अस्‍त्रों की शक्तियों के ऊपर बनाई है। ब्रह्मास्त्र और इसका इतिहास क्‍या है। इतिहास में कब और कितनी बार brahmastra का इस्‍तेमाल किया गया। इस लेख में हम आपको  brahmastra के बारे में विस्‍तार से बताने वाले है।

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Brahmastra kya hai

brahmastra ka itihas kya hai, ये जानने से पहले आपको ये जानना बहुत जरूरी है कि Brahmastra kya hai। आपने अपने बचपन  की किस्‍से कहानियो में इस पौराणिक अस्‍त्र के बारे में जरूर सुना होगा। वैसे अगर आप से पुरातन काल का परमाणू बम कहो तो गलत नही है। जिस तरह परमाणू बम के विस्‍फोट होने पर तबाही आ जाती है। उसी तरह से Brahmastra अगर एक बार छोड़ दिया जाये तो प्रलय आना तय है।

प्राचीन पौराणिक कथाओ के अनुसार Brahmastra का मतलब होता है ब्रह्म का अस्त्र।। जिस ईश्‍वर यानि कि ब्रह्म ने इस पूरे संसार को बनाया। उसी ईश्‍वर ने इस संसार को नष्‍ट करने के लिए Brahmastra की उत्‍पत्ति भी की। ब्रह्म ने ब्रह्मास्त्र की रचना इस दुनिया को दैत्‍यो और राक्षसों से बचाने के लिए की थी। एक वक्‍त था जब राक्षसो ने इस पूरी दुनियर में प्रलय मचा कर रख दी थी। ऐसे ही दुष्‍ट दैत्‍यों का सर्वनाश करने के लिए  ब्रह्म ने Brahmastra को बनाया था।  

ब्रह्मास्त्र की उत्‍पत्ति कैसे हुई

ब्रह्मास्त्र क्‍या है और इसे क्‍यो बनाया। ये बात तो इस लेख को यहा तक पढने के बाद आपके समझ में  आ गई होगी। आइये अब आपको बताते है कि ये ब्रह्मास्त्र कितना ज्‍यादा विनाशकारी  है।

प्राचीन पौराणिक कथाओ के अनुसार इस बेहद खतरनाक शस्‍त्र को पाने के लिए देवताओ को प्रसन्‍न करने के लिए कड़ी तपस्‍या करनी पड़ती थी। देवताओ ने भी कड़ी तपस्‍या करके ब्रह्मदेव से इस दिव्‍यअस्‍त्र को प्राप्‍त किया था। बाद में देवताओ से ये अस्‍त्र गंधर्वो के पास पहुंच गया। फिर वहा से ये मनुष्‍यो के पास आ गया। पुरातन  कथाओ के अनुसार इस दिव्‍यशस्‍त्र को पहली बार राजा विश्वामित्र ने महर्षि वशिष्ठ पर किया था, लेकिन अपनी ब्रह्मतेज के बल पर महर्षि वशिष्ठ बच गए और संसार का विनाश भी नहीं हुआ। 

इस दिव्‍यअस्‍त्र का जिक्र महाभारत और रामायण में भी मिलता है। ये अस्‍त्र इतना ज्‍यादा विनाशकारी  है कि अगर इसको एक बार छोड़ दिया जाये तो ये धरती के एक बड़े भू-भाग को पूरी तरह से नष्‍ट कर सकता है। इस दिव्‍यअस्‍त्र के दायरे में आने वाली मिट्टटी कुछ ही मिनटो में आग  का गोला बनकर हवा में उड़ने लगती है। आसमानो से आग की वर्षा होने लगती है। पेड़-पहाड़ सब टूटकर गिरने लगते है। इसके असर के दायरे में आने वाला इन्‍सान पलभर में वाष्‍प में बदलकर हवा में उड़ जाता है।

ब्रह्मास्त्र को लेकर शास्‍त्रों में ये भी कहा गया है कि यदि एक समय में दो ब्रह्मास्त्र आपस में टकराते है तो ये समझ लेना चाहिए कि प्रलय आने वाली है। इस टकराव से समस्‍त पृथ्‍वी का नाश हो सकता है। महाभारत के सौप्तिक पर्व में अध्‍याय 13  से लेकर अध्‍याय 15 तक ब्रह्मास्त्र और उसके असर के बारे में विस्‍तार से बताया गया है।

इस धर्म ग्रन्‍थ के अनुसार ये एक ऐसा दिव्‍य अस्‍त्र है कि जो जिस पर भी छोड़ा जाये उसे पूरी तरह से नष्‍ट कर देता है। इसकी वजह से ऐसी भंयकर आग लगती है कि उसके प्रभाव से धरती की कोई भी सजीव और निर्जीव चीज सुरक्षित नही रहती।  इसका असर इसके छोड़ने के कई सालो बाद तक रहता है। कई सालो तक उस स्‍थान पर जीवन नही पनप पाता जहा इसे छोड़ा गया होता है। पृथ्‍वी पर दरारे पड़ जाती है। कई सालो तक बारिश भी नही होती है।महाभारत में ब्रह्मास्त्र का इस्‍तेमाल कब हुआ

जैसा कि हम आपको इस लेख में पहले भी बता चुके है कि महाभारत काल में भी ब्रह्मास्त्र का जिक्र मिलता है। महाभारत में ये दिव्‍य अस्‍त्र  द्रोणाचार्य, अश्वत्थामा, कृष्ण, कुवलाश्व, युधिष्ठिर, कर्ण, प्रद्युम्न और अर्जुन के पास था। जब महाभारत का युद्ध खत्‍म हो गया था और गौरवो की हार हो चुकी थी। तब कौरवो की सेना में जिन्‍दा बचे अश्वथामा ने अपने पिता द्रोणाचार्य और कौरवो की मौत का बदला लेने के लिए पांडवो का सर्वनाश करने के लिए ब्रह्मास्त्र का इस्‍तेमाल करने की सोची थी। इधर ने भी अश्वत्थामा को देखकर अपनी कमान में ब्रह्मास्त्र को लगा दिया था। इन दोनो को ऐसा करते हुए देखकर नारदमुनि और महर्षि वेदव्‍यास ने इन दोनो से अपने अस्‍त्रो को वापस लेने को कहा था। महर्षि वेदव्‍यास की बात सुनकर अर्जुन ने तो अपना ब्रह्मास्त्र वापस ले लिया था लेकिन अश्वथामा को वापस लेने की विधि नही जानता था।

अश्वथामा ने इस दिव्‍य अस्‍त्र को पॉडवो की नगरी द्वारका की तरफ ना छोड़कर वहा से कोसो दूर समुद्र की तरफ छोड़ दिया था। इस तरह द्वारका तो खत्‍म होने से बच गई थी लेकिन इस अस्‍त्र से निकली रेडियों एक्टिव तरंगो की वजह से कारण द्वारका में सभी गर्भवती स्त्रियों की कोख में ही उनकी संतानों की मृत्यु हो गयी जिसमे पांडवों का आखिरी वंशज अभिमन्यु का पुत्र परीक्षित भी था जिसे बाद में भगवान कृष्ण ने जीवित कर दिया था।

Is bramastra a nuclear weapon I क्‍या ब्रह्मास्त्र की परमाणू बम है

पौणाणिक कथाओ में जिस तरह से ब्रह्मास्त्र की विनाशकारी शक्तियों के बारे में बताया गया है। उसे पढ़कर तो ऐसा ही प्रतीत होता है कि ये दिव्‍यअस्‍त्र ही आज के जमाने का परमाणू बम है। आधुनिक काल में जिस वैज्ञानिक जें रॉबर्ट ओपनहाइमर ने सबसे पहली बार परमाणू बम को बनाया था। उसने गीता और महाभारत का गहन अध्‍ययन भी किया था। उन्‍होने महाभारत में बताये गये bramastra की मारक क्षमता की बकायदा गहरी रिसर्च की थी। जें रॉबर्ट ओपनहाइमर परमाणू बम बनाने के लिए जो टीम तैयार की थी उसका नाम भी उन्‍होने ट्रिनिटी रखा था। वैज्ञानिक जें रॉबर्ट ओपनहाइमर  ने 16 जुलाई को दुनिया के इस पहले परमाणू बम के परिक्षण के बाद गीता का एक श्‍लोक भी पढ़ा था।

10 interesting facts about bramastra in hindi

  • ब्रह्मशिरा अस्त्र को ब्रह्मास्त्र से शक्तिशाली माना जाता है जो ब्रह्मा जी का पांचवा मुख भी है।
  • यह एक दम अचूक अस्त्र था अर्थात यह जिस भी लक्ष्य पर छोड़ा जायेगा वह लक्ष्य पूरी तरह विनाश की भेंट चढ़ जायेगा।
  • ब्रह्मास्त्र जहा भी गिरता हैं वहां धरती एक आग के गोले में बदल जाती है व आसपास भयंकर आग लग जाती है व विभिन्न प्रकार के हानिकारक रसायन फैल जाते है।
  • इससे उस क्षेत्र में कोई भी जीव जंतु, पेड़ पौधे कुछ नहीं बचता, चाहे समुंद्र हो या पहाड़, सब नष्ट हो जाता हैं।
  • इसका प्रकोप इतना भयानक है कि कम से कम 12 वर्षो तक उस धरती पर फिर से कोई जीवन का उदय नहीं हो पाता। यहाँ तक कि गर्भ में पल रहे बच्चे की भी मौत हो जाती है।
  • उस जगह पर पृथ्वी में दरारे पड़ जाती है व वर्षो तक वर्षा भी नहीं होती है व सूर्य के दर्शन नही होते है, जिस कारण वहां भयंकर सूखा पड़ता है।
  • इसे समूचे ब्रह्मांड की हर एक पदार्थ की ऊर्जा को समाहित करके बनाया गया था जिस कारण यह अत्यंत विनाशकारी अस्त्र था।
  • यह किसी बड़े युद्ध में धर्म व सत्य की रक्षा करने के उद्देश्य से चलाया जाने वाला अंतिम अस्त्र होता था।
  • जब दो ब्रह्मास्त्र आपस में टकराते हैं तो इससे पूरे विश्व के सामने भयानक संकट उत्पन्न हो जायेगा।

इस लेख मे हम आपको बताया कि Brahmastra ka itihas kya hai। हमे पूरी उम्‍मीद है कि आपको हमारा ये लेख पसन्‍द आया होगा।

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