Yoga kya hai | योग करने के 5 फायदे

योग को लेकर देश में पिछले कुछ सालो से काफी ज्‍यादा बाते हो रही है। अगर आप भी जानना चाहते हो कि yoga kya hai। तो ये लेख खास आपने लिए है। इस लेख में हम आपको योग को सभी महत्‍वपूर्ण जानकारिया देने वाले है। इस लेख को पूरा पढ़ने बाद आपको योग (yoga in hindi) के बारे में पूरी जानकारी मिल जायेगी। इस लेख में हम आपको ये भी बताने वाले है कि योग (about yoga in hindi) करना क्‍यो जरूरी है। योग करने के वैसे तो कई फायदे है। लेकिन हम आपको इस लेख में योग करने के 5 महत्‍वपूर्ण फायदो के बारे में बताने वाले है।
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Yoga kya hai

yoga kya hai in hindi

पिछले कुछ सालो में योग ने भारतीय समाज के मन पर अपनी महत्‍वपूर्ण छाप छोड़ी है। भारतीय संस्‍कृति से जुड़ी हुई ये परम्‍परा पिछले भारतीय के बीच पिछले कुछ सालो से काफी ज्‍यादा फेमस हो रही है। 21 जून को विश्‍वभर में अन्‍तराष्‍ट्रीय योग दिवस मनाया जा रहा है। योग (yoga in hindi) अपने आप शरीर और मन पर काम करने वाला पूर्ण विज्ञान है। ये अध्‍यात्‍म की दुनिया का भी वो रास्‍ता है जिसपर चलकर मनुष्‍य अपनी आत्‍मा तक पहुंच सकता है। योग मुख्‍य तौर इन्‍सान के मन, शरीर और आत्‍मा पर काम करता है। इसका लिखित इतिहास तकरीबन 5000 साल पुराना है। पुराने समय से मन और शरीर को ठीक करने की ये पद्धति एक बार फिर दुनिया भर को अपनी तरफ आर्कषित कर रही है। ये पूरी तरह से आर्यवैदिक सिद्धान्‍तो पर आधारित है। योग इन्‍सान के शरीर को हेल्‍दी और उसके मन को चेतनाशील बनाता है।

योग का अर्थ क्‍या है

इस लेख को यहा तक पढने के बाद आपको Yoga kya hai। ये थोड़ा बहुत समझ आ गया होगा। योग संस्‍कृत भाषा की युज धातू से बना है। युज का मतलब होता है आत्‍मा का परमात्‍मा से मिलन। अगर योग शब्‍द के शाब्दिक अर्थ के बारे में विचार किया जाये तो योग का मतलब होता है जुड़ना। इसको आप प्‍लस भी कह सकते हो। इसको आप ऐसे भी समझ सकते हो कि 1 और 1 का योग 2 होगा। यानि कि दो चीजो का मिलन योग कहलाता है। योग में इसका मतलब अपनी आत्‍मा को परमात्‍मा से जोड़ने से है। यानि कि वो प्रक्रिया जो आत्‍मा को परमात्‍मा से जोड़ सकती है उसे योग कहते है। योग का मतलब भी इसी में निहित है। जब मनुष्‍य के शरीर में वास करने वाली आत्‍मा किसी प्रोसेस के जरिये अपने आपको परमात्‍मा से जोड़ने की कोशिश करने लगती है। उसे ही योग कहते है।

Yoga kya hai

योग का इतिहास क्‍या है

इस लेख को यहा तक पढने के बाद आपको ये तो पता चल गया कि योग और उसका अर्थ क्‍या है। अब हम योग को डिटेल मे समझने की कोशिश करते है। योग का इतिहास तकरीबन 5000 साल पुराना है। ये बात तो हम आपको इस लेख में पहले भी बता चुके है। योग के इतिहास अब गहराई से समझने की कोशिश करते है। योग के इतिहास को लेकर आप ये कह सकते हो कि तब से मानव सभ्‍यता शुरू हुई है तब ये ही मनुष्‍य किसी ना किसी रूप में योग कर रहा है। योग की शुरूआत धर्मो से काफी पहले हो चुकी थी। अगर योग को सनातन धर्म से जोड़कर देखा जाये तो भगवान शिव को पहला योगी कहा जा सकता है। भगवान शिव को आदि योगी और आदि गुरू भी कहा जाता है। भगवान शिव को ही योग का जनक भी कहा जाता है
योग को इतिहास को लेकर ऐसा माना जाता है कि कई लाखो साल पहले कांति सरोवर झील की तटों पर रहने वाले आदिगुरू ने सप्‍तऋषि को अपना ज्ञान दिया था। सप्‍तऋषियों ने आदि गुरू से मिले इस महत्‍वपूर्ण ज्ञान को एशिया, मध्‍यएशिया, उत्‍तरी अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका सहित विश्‍वभर में पहुंचाया। इसीलिए योग के इतिहास से जुड़े अभिलेख पूरी दुनिया में मौजूद है। योग को लेकर खास बात ये है कि इसकी शुरूआत प्राचीन भारत से हुई। ऐसा माना जाता है कि अगस्‍त नाम के सप्‍तऋषि ने पूर भारतीय उपमहादीप का दौरा करके योग की जीवन जीने की संस्‍कृति को गढ़ा था।

भारत में अब तक कई ऐसी प्राचीन मोहर और चित्र मिल चुके है जो इस बात की तरफ इशारा करते है कि योग कई हजार साले पहले से इस धरती पर मौजूद था। सिंधु घाटी सभ्‍यता की खुदाई में भी कई ऐसे अवशेष और मुहरे मिली जिसे कई लोग एक साथ योग करते हुए देखे जा सकते है।

Yoga kya hai : योग के कितने प्रकार है

इस लेख में हमने आपको अब तक योग के बारे में काफी कुछ बता दिया है। योग के इतिहास के बारे में तो हमने आपको बता दिया। अब हम आपको बताते है कि योग कितने प्रकार का होता है।
योग शरीर के हर अंग पर असर करता है। ये शरीर के अंगोंं को अधिक लचीला और मजबूत बनाता है। योग कई तरह से किया जा सकता है। शरीर के अलग अलग अंगो के लिए अलग अलग योग के प्रकार है। योग के कुछ महत्‍वपूर्ण प्रकार कुछ इस तरह है।

Yoga kya hai

1. अष्टांग योग– ये योग काफी पापुलर और सबसे ज्‍यादा करने वाला योग है। इस प्रकार के योग में योग की पुरानी शिक्षाओ का प्रयोग किया जाता है। वैसे तो इसका इतिहास काफी पुराना है लेकिन ये 1970 के दशक के दौरान काफी ज्‍यादा फेमस हुआ था। अष्‍टांग योग में मेन तौर पर छ मुद्रायें होती है। ये योग मुख्‍य तौर पर मनुष्‍य की सांसो पर काम करता है।

2. बिक्रम योग– इस योग का हाट योगा भी कहा जाता है। इसको हॉट योगा इसलिए कहा जाता है क्‍योकि इसको मुख्‍य रूप से एक कृत्रिम गर्म कमरे में 105 डिग्री के तापमान पर किया जाता है। इस योग में कुल 26 पोज है। इस योग को करते वक्‍त सांसो के ऊपर काफी ध्‍यान दिया जाता है।

3. हठ योग- ये भी एक महत्‍वपूर्ण योग है। हठ योग में कई ऐसी योग मुद्राये की जाती है जो शरीर को पूरी तरह से स्‍वस्‍थ रखने में काफी कारगार साबित होती है।

4. अयंगर योग– इस प्रकार के योग में कम्‍बल, तकिया, कुर्सी और गोल लम्‍बे तकिये का प्रयोग किया जाती है।

5. जीवामुक्ति योग- इस योग का मतलब हफ जीवित रहते हुए जीवन से मुक्ति। इस योग में अत्‍यामिकता पर काफी ध्‍यान दिया जाता है। ये योग खुद एक पोज में रखने के बजाय पेाज के बीच रफ्तार बढ़ाने पर फोकस करता है।

6. कृपालु योग– इस योग के जरिये व्‍यक्ति अपने आप को काफी अच्‍छे तरीके से जान सकता है। ये योग मन को जानने, स्‍वीकार करने और हमेशा सीखते रहने की शिक्षा देता है।

7. कुंडलिनी योग– ये भी एक काफी ज्‍यादा पापुलर योग है। यहा कुंडलिनी का मतलब है एक साप की तरह कुंडलित होना। कुंडलिनी योग ध्‍यान की एक प्रणाली है जिसका लक्ष्‍य मन में दबी हुई ऊजा को बाहर निकालना है।

8. पावर योग: 1980 के दशक के अंत में, प्रेक्टिशनरों ने पारंपरिक अष्टांग प्रणाली पर आधारित इस सक्रिय और एथलेटिक प्रकार के योग का विकास किया।

योग की मुद्रायें – Yoga Mudra in Hindi

योग की विभिन्न मुद्राएं (Yoga Mudra in Hindi) निम्न प्रकार हैं-

1. स्थायी योग

  • कोणासन – प्रथम
  • कोणासन द्वितीय
  • कतिचक्रासन
  • हस्तपादासन
  • अर्ध चक्रसन
  • त्रिकोणासन
  • वीरभद्रासन या वीरभद्रासन
  • परसारिता पादहस्तासनं
  • वृक्षासन
  • पस्चिम नमस्कारासन
  • गरुड़ासन
  • उत्कटासन

2. बैठने कर करने वाले योग

  • जनु शिरसाना
  • पश्चिमोत्तानासन
  • पूर्वोत्तानासन
  • अर्ध मत्स्येन्द्रासन
  • बद्धकोणासन
  • पद्मासन
  • मरजरिसाना
  • एका पादा राजा कपोतसाना
  • शिशुआसना
  • चौकी चलनसाना
  • वज्रासन
  • गोमुखासन

3. पेट योगा की मुद्रा में लेटना

  • वसिष्ठासना
  • अधो मुख सवासना
  • मकर अधो मुख संवासन
  • धनुरासन
  • भुजंगासन
  • सलम्बा भुजंगासन
  • विपरीता शलभासन
  • शलभासन
  • उर्ध्वा मुख संवासना

4. पीठ के बल लेटकर योग

  • नौकासन
  • सेतु बंधासन
  • मत्स्यासन
  • पवनमुक्तासन
  • सर्वांगसन
  • हलासन
  • नटराजासन
  • विष्णुअसना
  • शवासन
  • सिरसासन

योग के 5 फायदे क्‍या है

  • आपके लचीलेपन में सुधार करता है
  • मांसपेशियों की ताकत बढ़ाता है
  • आपके पोस्चर्स को परिपूर्ण करता है
  • उपास्थि और जोड़ों को टूटने से बचाता है
  • आपकी रीढ़ की हड्डी की सुरक्षा करता है

योग का अर्थ क्‍या है

योग संस्‍कृत भाषा की युज धातू से बना है। युज का मतलब होता है आत्‍मा का परमात्‍मा से मिलन। अगर योग शब्‍द के शाब्दिक अर्थ के बारे में विचार किया जाये तो योग का मतलब होता है जुड़ना। इसको आप प्‍लस भी कह सकते हो।

योग के जनक कौन है

भगवान शिव को पहला योगी माना गया है। उन्‍हे ही योग का जनक कहा गया है।

योग का मुख्‍य उद्देश्‍य क्‍या है

योग का मुख्‍य उद्देश्‍य शरीर और मन को स्‍वस्‍थ रखना है।

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